संबंध और फलन कक्षा 12 (Relation and Function Class 12th)

परिचय

अंग्रेजी भाषा में Relation (संबंध) शब्द का अर्थ दो वस्तुओं के बीच संबंध या कड़ी होता है। गणित में, इसी अवधारणा का प्रयोग दो संख्याओं या राशियों के बीच  किया जाता है। पिछली कक्षा में, हमने समुच्चय के कार्तीय गुणन, प्रांत, सहप्रांत, परिसर, वास्तविक फलन, तत्समक फलन, अचर फलन, बहुपद फलन, परिमेय फलन आदि जैसे संबंधों और फलनों का अध्ययन किया है। कक्षा 12वीं में, हम संबंध और फलन (Relation and Function) के बारे में और अधिक अध्ययन करेंगे।

संबंध और फलन कक्षा 12 (Relation and Function Class 12th)

संबंध की परिभाषा

एक संबंध R, कार्तीय गुणन A×B का एक उपसमुच्चय होता है, जहाँ A और B अरिक्त समुच्चय हैं। A×B का उपसमुच्चय, A और B के अवयवों के बीच संबंध को दर्शाता है। A का एक अवयव एक विशेष क्रम में B के एक अवयव से संबंधित होगा। अन्य अवयव भी उसी क्रम का पालन करेंगे। A के अवयव प्रथम अवयव हैं और B के अवयव द्वितीय अवयव हैं। द्वितीय अवयव को प्रथम अवयव का प्रतिबिम्ब कहते हैं।

मान लीजिए A प्राकृतिक संख्याओं का एक समुच्चय है और B पूर्ण संख्याओं का एक समुच्चय है। x पहला अवयव है, और y क्रमित युग्म (x, y) का दूसरा अवयव है। तब A से B में संबंधों के कुछ उदाहरण हैं –

  1. R = {(x, y): x, y की अगली गिनती की संख्या है, x ∈ A, y ∈ B}
  2. R = {(x, y): x, y का वर्ग है, x ∈ A, y ∈ B}
  3. R = {(x, y): x, y का वर्गमूल है, x ∈ A, y ∈ B}
  4. R = {(x, y): x, y का गुणज है, x ∈ A, y ∈ B}
  5. R = {(x, y): x, y का गुणनखंड है, x ∈ A, y ∈ B}

उपरोक्त सभी उदाहरणों में, x और y के बीच एक संबंध है, इसलिए हम x R y लिखते हैं। हम (x, y) ∈ R भी लिख सकते हैं। सभी संबंध A×B के उपसमुच्चय हैं।

संबंधों के प्रकार

1) रिक्त संबंध – समुच्चय A में यदि कोई संबंध R ऐसा हो कि A का अवयव A के किसी भी अवयव से संबंधित ना हो तो संबंध R को रिक्त संबंध कहा जाता है। इसका अर्थ है कि A×A का उपसमुच्चय Φ है। अर्थात, R = Φ है।

उदाहरण – मान लीजिए A सम संख्याओं का समुच्चय है। दर्शाइए कि समुच्चय A में R = {(x, y): x, y की अगली गिनती की संख्या है} द्वारा दिया गया संबंध R, रिक्त संबंध है।

हल – हम जानते हैं कि A सम संख्याओं का समुच्चय है, इसलिए कोई भी संख्या अगली गिनती संख्या नहीं हो सकती है। इसलिए, R रिक्त संबंध है, और R = Φ है।

2) सार्वत्रिक संबंध – समुच्चय A में यदि कोई संबंध R इस प्रकार हो कि A का प्रत्येक अवयव समुच्चय A के ही प्रत्येक अवयव से संबंधित हो तो संबंध R को सार्वत्रिक संबंध कहा जाता है। इसका अर्थ है कि A×A का प्रत्येक उपसमुच्चय संबंध में है। अर्थात, R = A×A है।

उदाहरण – यदि P वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है। दर्शाइए कि समुच्चय P में R = {(a, b): a और b का योग भी एक वास्तविक संख्या है} द्वारा दिया गया संबंध R, सार्वत्रिक संबंध है।

हल – चूँकि P वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है, इसलिए किन्हीं दो संख्याओं का योग भी एक वास्तविक संख्या होगी। इसलिए, संबंध R सार्वत्रिक संबंध है, और R = P×P है।

नोट – कभी-कभी रिक्त संबंध और सार्वत्रिक संबंध को तुच्छ संबंध भी कहा जाता है।

3) स्वतुल्य संबंध – समुच्चय A में यदि कोई संबंध R ऐसा हो कि A का प्रत्येक अवयव स्वयं से संबंधित हो तो संबंध R को स्वतुल्य संबंध कहा जाता है। इसका अर्थ है A×A के प्रत्येक उपसमुच्चय के लिए, (a, a) ∈ R प्रत्येक a ∈ A के लिए है।

उदाहरण – मान लीजिए कि समुच्चय B = {1, 3, 5, 7} है, तो दर्शाइए कि B में R = {(y, y): y, y से विभाज्य है} द्वारा दिया गया संबंध R, स्वतुल्य संबंध है।

हल – हम जानते हैं कि प्रत्येक संख्या स्वयं से भी विभाज्य होती है, इसलिए समुच्चय B की प्रत्येक संख्या भी स्वयं से विभाज्य होगी। इसलिए, संबंध R स्वतुल्य संबंध है और (y, y) ∈ R प्रत्येक y ∈ B के लिए है।

4) सममित संबंध – एक समुच्चय A में, यदि कोई संबंध R इसप्रकार है कि अवयव a1, अवयव a2 से संबंधित है और अवयव a2, भी अवयव a1 से संबंधित है तो संबंध R को सममित संबंध के रूप में जाना जाता है। A×A के एक उपसमुच्चय के लिए, यदि (a1, a2) ∈ R का तात्पर्य है कि (a2, a1) ∈ R, सभी a1, a2 ∈ A के लिए।

उदाहरणयदि समुच्चय X = {1, 2, 3} है, तो जाँच करें कि X में R = {(1, 2), (2, 1), (1, 3), (3, 1), (2, 3), (3, 2)} द्वारा दिया गया संबंध R, सममित संबंध है या नहीं।

हलचूँकि R = {(1, 2), (2, 1), (1, 3), (3, 1), (2, 3), (3, 2)}

हम देख सकते हैं कि (1, 2) ∈ R और (2, 1) ∈ R भी है। इसका अर्थ है कि 1, 2 से संबंधित है और 2 भी 1 से संबंधित है। अन्य सभी अवयव भी सममित क्रम में एक दूसरे से संबंधित हैं। इसलिए, संबंध R सममित संबंध है।

5) संक्रामक संबंध – समुच्चय A में एक संबंध R को संक्रामक संबंध कहा जाता है यदि अवयव a1, अवयव a2 से संबंधित है, अवयव a2, अवयव a3 से संबंधित है, और अवयव a1 भी अवयव a3 से संबंधित है। A×A के एक उपसमुच्चय के लिए, यदि (a1, a2) ∈ R और (a2, a3) ∈ R का अर्थ है कि (a1, a3) ∈ R, सभी a1, a2, a3 ∈ A के लिए।

उदाहरण – मान लीजिए समुच्चय T = {राम, श्याम, स्वामी} तो जाँच करें कि T में R = {(x, y): x, y का भाई है} द्वारा दिया गया संबंध R संक्रामक संबंध है या नहीं।

हल – यहाँ, R = {(x, y): x, y का भाई है}

दिए गए संबंध में, यदि राम श्याम का भाई है और श्याम स्वामी का भाई है तो राम भी स्वामी का भाई है। अत: संबंध R संक्रामक संबंध है।

6) तुल्यता संबंध – समुच्चय A में, संबंध R को तुल्यता संबंध कहा जाता है यदि संबंध R स्वतुल्य, सममित और संक्रामक है।

उदाहरण – यदि समुच्चय E सभी परिमेय संख्याओं का समुच्चय है और R, E में R = {(a, b): a + b एक परिमेय संख्या है} द्वारा दिया गया संबंध है। दर्शाइये कि R एक तुल्यता संबंध है।

हलहम जानते हैं कि दो परिमेय संख्याओं का योग सदैव एक परिमेय संख्या होती है। इसलिए, संबंध R स्वतुल्य है क्योंकि दो समान परिमेय संख्याओं (a + a) का योग भी एक परिमेय संख्या होता है।

संबंध R सममित है क्योंकि यदि (a + b) एक परिमेय संख्या है तो (b + a) भी एक परिमेय संख्या होगी।

तीन परिमेय संख्याओं a, b, c, के लिए,

यदि (a + b) एक परिमेय संख्या है और (b + c) एक परिमेय संख्या है तो (a + c) भी एक परिमेय संख्या होगी। अत: संबंध R संक्रामक है।

चूँकि संबंध R स्वतुल्य, सममित और संक्रामक है, इसलिए संबंध R एक तुल्यता संबंध है।

फलन की परिभाषा

फलनों के प्रकार

फलनों का संयोजन और व्युत्क्रमणीय फलन

द्वि-आधारी संक्रियाएँ

संबंध और फलन कक्षा 12 (Relation and Function Class 12th) अँग्रेजी में

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