समुच्चय कक्षा 11 (The Sets Class 11th)

Samuchchay Kaksha 11

परिचय

समुच्चय का सिद्धांत जर्मन गणितज्ञ जॉर्ज कैंटर (Georg Cantor) द्वारा दिया गया है। गणित में समुच्चय की अवधारणा का प्रयोग लगभग हर शाखा में किया जाता है। संबंध और फलन की अवधारणा को समझाने के लिए समुच्चय का उपयोग किया जाता है। समुच्चय का ज्ञान ज्यामिति, अनुक्रम, प्रायिकता, संख्या प्रणाली आदि के अध्ययन में मदद करता है। कक्षा 11 में, हम समुच्चय (The Sets Class 11th) की परिभाषा और निरूपण, रिक्त समुच्चय, परिमित और अपरिमित समुच्चय, समान समुच्चय, उपसमुच्चय, घात समुच्चय और सार्वत्रिक समुच्चय आदि का अध्ययन करेंगे।

समुच्चय कक्षा 11 (The Sets Class 11th)

परिभाषा

वस्तुओं के अच्छी तरह से परिभाषित संग्रह को समुच्चय कहा जाता है। उदाहरण – पुस्तकों का संग्रह, कारों का संग्रह, कविताओं का संग्रह आदि। गणित में, ये संग्रह उनकी शाखा से संबंधित होते हैं जैसे प्राकृतिक संख्याओं का संग्रह, पूर्णांक संख्याओं का संग्रह, वास्तविक संख्याओं का संग्रह, सम संख्याओं का संग्रह आदि।

आइए समझने के लिए कुछ संग्रह लेते हैं।

  1. 6 से कम के धनात्मक पूर्णांक, अर्थात् 1, 2, 3, 4, 5
  2. धार्मिक पुस्तकें जैसे गीता, महाभारत, रामायण, बाइबिल, कुरान।
  3. 10 से बड़ी और 20 से छोटी विषम संख्याएं, अर्थात् 11, 13, 15, 17, 19
  4. विभिन्न प्रकार के चतुर्भुज

उपरोक्त संग्रह में, सभी वस्तुओं को अच्छी तरह से परिभाषित किया गया है क्योंकि प्रत्येक वस्तु अपने विशेष संग्रह से संबंधित है। उदाहरण के लिए, हम कह सकते हैं कि समकोण त्रिभुज विभिन्न प्रकार के चतुर्भुजों के संग्रह से संबंधित नहीं है। लेकिन आयत इस संग्रह से संबंधित है।

समुच्चय के कुछ उदाहरण जो विशेष रूप से गणित में उपयोग किए जाते हैं-

N : प्राकृत संख्याओं का समुच्चय

Z : सभी पूर्णांकों का समुच्चय

W : सभी पूर्ण संख्याओं का समुच्चय

Q : सभी परिमेय संख्याओं का समुच्चय

T : सभी अपरिमेय संख्याओं का समुच्चय

R : वास्तविक संख्याओं का समुच्चय

Z+ : सभी धनात्मक पूर्णांकों का समुच्चय

Z–  : सभी ऋणात्मक पूर्णांकों का समुच्चय

Q+ : सभी धनात्मक परिमेय संख्याओं का समुच्चय

Q–  : सभी ऋणात्मक परिमेय संख्याओं का समुच्चय

R+ : सभी धनात्मक वास्तविक संख्याओं का समुच्चय

R–  : सभी ऋणात्मक वास्तविक संख्याओं का समुच्चय

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

  1. समुच्चय को बड़े अक्षरों जैसे X, Y, R, A, N, B, C, आदि द्वारा निरूपित किया जाता है।
  2. समुच्चय की वस्तुओं या अवयवों को छोटे अक्षरों जैसे x, y, r, a, n, b, c, आदि द्वारा दर्शाया जाता है।
  3. एक समुच्चय की वस्तुएँ, अवयव और सदस्य एक दूसरे से संबंधित होते हैं क्योंकि वे सभी एक विशेष सेट से संबंधित होते हैं।
  4. एक समुच्चय के अवयवों को हमेशा अच्छी तरह से परिभाषित किया जाना चाहिए।
  5. यदि x समुच्चय Z का एक अवयव है, तो हम x ∈ Z लिखते हैं। जहाँ ग्रीक भाषा के प्रतीक ∈ (एप्सिलॉन) का अर्थ है ‘से संबंधित’ इसलिए हम कह सकते हैं कि “x, Z से संबंधित है”। यदि y समुच्चय Z का अवयव नहीं है, तो हम y ∉ Z लिखते हैं जिसका अर्थ है कि “y, Z से संबंधित नहीं है”।

समुच्चय का निरूपण कैसे करें

समुच्चय को निरूपित करने की दो विधियाँ हैं।

  1. रोस्टर या सारणीबद्ध रूप
  2. समुच्चय निर्माण रूप

(1) रोस्टर या सारणीबद्ध रूप – इस विधि में, हम विशेष समुच्चय से संबंधित सभी अवयवों को मझले कोष्ठक में लिखते हैं। सभी अवयव अच्छी तरह से परिभाषित होने चाहिए और अल्पविराम से अलग होने चाहिए।

उदाहरण – 1) 10 से छोटी पूर्ण संख्याओं का समुच्चय लिखिए।

हलA = {0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9}

उदाहरण – 2) ‘COLLEGE’ शब्द बनाने वाले अक्षरों का समुच्चय लिखिए।

हलB = {C, O, L, E, G}

उदाहरण – 3) अभाज्य संख्याओं का समुच्चय लिखिए।

हलC = {2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19…}

नोट -1) रोस्टर या सारणीबद्ध रूप में समुच्चय के अवयवों को किसी भी क्रम में लिखा जा सकता है। उदाहरण (1) के लिए, समुच्चय को {1, 5, 9, 7, 8, 0, 2, 3, 4, 6} या {9, 8, 7, 6, 5, 4, 3, 2, 1, 0} के रूप में भी लिखा जा सकता है।

2) रोस्टर या सारणीबद्ध रूप में कोई भी अवयव केवल एक बार लिखा जाता है उसे दोहराया नहीं जा सकता। उदाहरण (2) में ‘L’ और ‘E’ अक्षर दो बार दोहराए गए हैं लेकिन समुच्चय में हमने उन अक्षरों को दोहराया नहीं है।

3) उदाहरण (3) में, अभाज्य संख्याओं के समुच्चय में, तीन बिंदु यह दिखा रहे हैं कि अभाज्य संख्याएँ अनंत हैं।

(2) समुच्चय निर्माण रूप – इस विधि में, हम एक प्रतीक द्वारा समुच्चय के अवयवों को दर्शाते हैं और समुच्चय के अवयवों के विशिष्ट गुणधर्म को लिखते हैं जो एक कोलन चिन्ह द्वारा अलग होते है। यह पूरा विवरण मझले कोष्ठक के भीतर संलग्न होता है। इसे स्पष्ट रूप से समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं।

उदाहरण – 1) -5 से बड़े ऋणात्मक पूर्णांकों के लिए समुच्चय निर्माण रूप में समुच्चय लिखें।

हल A = {x : x एक ऋणात्मक पूर्णांक है और x > -5}

हम इसे इस प्रकार पढ़ते हैं कि “सभी x का समुच्चय, जहाँ x एक ऋणात्मक पूर्णांक है और x, -5 से बड़ा है”। अत: समुच्चय A के अवयव -4, -3, -2, -1 हैं।

उपरोक्त विवरण में, मझले कोष्ठक का प्रयोग “सभी x का समुच्चय” के लिए और कोलन चिन्ह का प्रयोग “जहाँ x” के लिए किया जाता है। यदि समुच्चय को रोस्टर या सारणीबद्ध रूप में लिखा जाता है तो हम उस समुच्चय को समुच्चय निर्माण रूप में भी लिख सकते हैं।

उदाहरण – 2) समुच्चय V = {2, 4, 6, 8, 10…} को समुच्चय निर्माण रूप में लिखें।

हलV = {y : y एक सम संख्या है }

उदाहरण 3) ‘HUMAN’ शब्द के लिए समुच्चय निर्माण रूप में समुच्चय लिखें। साथ ही रोस्टर या सारणीबद्ध रूप में भी लिखें।

हलसमुच्चय निर्माण रूप में, D = {z : z HUMAN शब्द का एक अक्षर है}

रोस्टर या सारणीबद्ध रूप में, D = {H, U, M, A, N}

उदाहरण – 4) समुच्चय E = {0, 1, 8, 27, 64…} को समुच्चय निर्माण रूप में लिखें।

हल – E = {x : x एक पूर्ण संख्या का घन है}

हम यह भी लिख सकते हैं, E = {x : x = n3, जहाँ n ∈ W}

रिक्त समुच्चय

परिभाषा – शून्य अवयवों वाले समुच्चय को रिक्त समुच्चय कहते हैं। रिक्त समुच्चय में कोई अवयव नहीं होता है इसलिए इसे शून्य समुच्चय भी कहा जाता है। रिक्त समुच्चय को Φ या { } के प्रतीक द्वारा निरूपित किया जाता है।

रिक्त समुच्चय के कुछ उदाहरण

(1) यदि A = {x : x2 = 3, x एक प्राकृत संख्या है}

हम जानते हैं कि किसी भी प्राकृत संख्या का वर्ग 3 के बराबर नहीं होता है इसलिए A रिक्त समुच्चय है।

(2) माना B = {x : x शून्य से बड़ा एक ऋणात्मक पूर्णांक है}

यहाँ, B रिक्त समुच्चय होगा क्योंकि ऐसा कोई ऋणात्मक पूर्णांक नहीं है जो शून्य से बड़ा हो।

(3) माना C = {x : x = ½, 1/3, ¼, जहाँ x एक पूर्ण संख्या है}

x के मान परिमेय संख्याएँ हैं न कि पूर्ण संख्याएँ इसलिए C एक रिक्त समुच्चय है।

(4) यदि D = {y : y, 2 से छोटी अभाज्य संख्या है}

हम जानते हैं कि 2 सबसे छोटी अभाज्य संख्या है और कोई अन्य अभाज्य संख्या नहीं है जो 2 से छोटी हो। अतः D एक रिक्त समुच्चय है।

(5) यदि E = {y : y एक सम संख्या है और y = 5}

E रिक्त समुच्चय होगा क्योंकि 5 विषम संख्या है, सम संख्या नहीं है।

उपरोक्त सभी उदाहरणों में, सभी समुच्चयों में कोई अवयव नहीं है, इसलिए ये सभी रिक्त समुच्चय हैं।

परिमित और अपरिमित समुच्चय

परिमित समुच्चयवह समुच्चय परिमित कहलाता है जब या तो वह एक रिक्त समुच्चय होता है या उसमें एक निश्चित संख्या में अवयव होते हैं।

उदाहरण – 1) X = {1, 2, 3, 4, 5, 6, 7}

2) Y = {x : x, 10 से कम एक धनात्मक पूर्णांक है}

अपरिमित समुच्चयवह समुच्चय जिसमें एक निश्चित संख्या में अवयव नहीं होते हैं, अपरिमित समुच्चय कहलाता हैं। समुच्चय निर्माण रूप में, हम अपरिमित समुच्चय को आसानी से लिख सकते हैं लेकिन रोस्टर या सारणीबद्ध रूप में, हम अपरिमित समुच्चय के सभी अवयवों को मझले कोष्ठक में नहीं लिख सकते हैं इसलिए हम समुच्चय के कुछ अवयवों को लिखकर उसके बाद तीन बिंदु लगाकर अपरिमित समुच्चय को दर्शाते हैं।

उदाहरण – 1) A = {x : x एक प्राकृत संख्या है}

2) B = {2, 4, 6, 8, 10 …} सम संख्याओं का समुच्चय है।

3) C = {0, 1, 2, 3, 4 …} पूर्ण संख्याओं का समुच्चय है।

नोट – हम उन अपरिमित समुच्चयों को रोस्टर या सारणीबद्ध रूप में नहीं लिख सकते हैं जो किसी विशेष पैटर्न का पालन नहीं करते है। उदाहरण के लिए, वास्तविक संख्याओं के समुच्चय को रोस्टर या सारणीबद्ध रूप में नहीं लिखा जा सकता है क्योंकि इस समुच्चय के अवयव किसी विशेष पैटर्न का पालन नहीं करते हैं।

समान समुच्चय

यदि दो समुच्चयों के अवयव एक समान हों तो वे समान समुच्चय कहलाते हैं। दो समुच्चय A और B हैं, और समुच्चय A के अवयव वही हैं जो समुच्चय B के अवयव हैं तो समुच्चय A और समुच्चय B समान समुच्चय कहलाते हैं और हम A = B लिख सकते हैं। यदि समुच्चय A और समुच्चय B बराबर नहीं हैं तब हम A ≠ B लिखते हैं।

उदाहरण -1) समुच्चय A = {1, 3, 5, 7, 9} और समुच्चय B = {9, 1, 5, 7, 3} समान समुच्चय हैं या नहीं?

हलसमुच्चय A और समुच्चय B समान समुच्चय हैं क्योंकि समुच्चय A और समुच्चय B के सभी अवयव बिल्कुल समान हैं इसलिए A = B।

उदाहरण 2) समुच्चय X = {H, O, N, E, S, T} और समुच्चय Y = {H, O, N, T, Y, E, S} समान समुच्चय हैं या नहीं?

हल – जैसा कि हम देख सकते हैं कि समुच्चय X और समुच्चय Y के सभी अवयव बिल्कुल समान नहीं हैं इसलिए समुच्चय X और समुच्चय Y समान समुच्चय नहीं हैं X ≠ Y।

उपसमुच्चय

यदि दो समुच्चय A और B हैं, और समुच्चय A का प्रत्येक अवयव समुच्चय B का भी एक अवयव है तो समुच्चय A को समुच्चय B का उपसमुच्चय कहा जाता है। सांकेतिक रूप में, हम A ⊂ B लिख सकते हैं। यदि समुच्चय A, समुच्चय B का उपसमुच्चय नहीं है तो हम A ⊄ B लिखते हैं।

जब A ⊂ B, यदि जब कभी a ∈ A, तो a ∈ B. हम प्रतीक ⟹ (तात्पर्य है) का उपयोग करके उपसमुच्चय की परिभाषा सांकेतिक रूप में लिख सकते हैं। समुच्चय A और B के लिए,

A ⊂ B यदि a ∈ A ⟹ a ∈ B

हम इसे पढ़ते हैं “समुच्चय A, समुच्चय B का एक उपसमुच्चय है यदि a समुच्चय A का एक अवयव है, तो इसका तात्पर्य है कि a समुच्चय B का भी एक अवयव है”।

उपरोक्त समुच्चय A और B के लिए, A ⊂ B का अर्थ समुच्चय A का प्रत्येक अवयव समुच्चय B का भी एक अवयव है। यदि समुच्चय B का प्रत्येक अवयव भी समुच्चय A का एक अवयव है तो B ⊂ A भी है। इस स्थिति में, समुच्चय A और समुच्चय B समान समुच्चय हैं इसलिए हम A ⊂ B और B ⊂ A ⟺ A = B लिखते हैं, जहां प्रतीक ‘⟺’ का उपयोग दो-तरफा तात्पर्य के लिए किया जाता है और ‘यदि और केवल यदि’ पढ़ा जाता है। संक्षेप में, हम इसे “iff” लिख सकते हैं।

नोट – 1) यदि दो समुच्चय समान समुच्चय हैं तो वे एक दूसरे के उपसमुच्चय भी होते हैं। इसका अर्थ है कि प्रत्येक समुच्चय स्वयं का एक उपसमुच्चय होता है। समुच्चय X के लिए, X ⊂ X।

2) Φ प्रत्येक समुच्चय का उपसमुच्चय होता है क्योंकि Φ एक रिक्त समुच्चय है और इसमें कोई अवयव नहीं होता है।

3) समुच्चय A और B के लिए, यदि A ⊂ B और A ≠ B तो समुच्चय A को समुच्चय B का उचित उपसमुच्चय कहा जाता है, और समुच्चय B को समुच्चय A का अधिसमुच्चय कहा जाता है।

4) यदि किसी समुच्चय में केवल एक अवयव हो तो उसे एकल समुच्चय कहते हैं। समुच्चय A = {1} एक एकल समुच्चय है।

उदाहरण 1) समुच्चय A = {a, e, i, o, u}, समुच्चय B = {a, b, e, f, g, i, o, u, z} का उपसमुच्चय है इसलिए हम A ⊂ B लिखते हैं। यहाँ, A ≠ B अतः समुच्चय A, समुच्चय B का उचित उपसमुच्चय है।

2) प्राकृत संख्याओं का समुच्चय N वास्तविक संख्याओं के समुच्चय R का उपसमुच्चय है और हम N ⊂ R लिखते हैं।

3) मान लीजिए समुच्चय X = {1, 2, 3, 4, 5, 6} और समुच्चय Y = {x: x एक प्राकृत संख्या है और 1 ≤ x ≤ 6}। तब X ⊂ Y और Y ⊂ X इसलिए, हम X = Y लिख सकते हैं।

4) माना समुच्चय Q = {x : x एक परिमेय संख्या है} और समुच्चय T = {y : y एक अपरिमेय संख्या है}। तब Q ⊄ T और T ⊄ Q।

घात समुच्चय

माना समुच्चय A = {a, b} तो इसके उपसमुच्चय {a}, {b}, समुच्चय स्वयं {a, b} और रिक्त समुच्चय Φ होंगे। समुच्चय A के चार उपसमुच्चय {a}, {b}, {a, b} और Φ हैं। इन सभी उपसमुच्चयों के समुच्चय को A का घात समुच्चय कहते हैं।

परिभाषा – किसी समुच्चय के सभी उपसमुच्चयों के समुच्चय को उस समुच्चय का घात समुच्चय कहते हैं। इसे P(A) द्वारा निरूपित किया जाता है।

उपरोक्त समुच्चय A के लिए,

घात समुच्चय P(A) = {Φ, {a}, {b}, {a, b}}

नोट – उपरोक्त समुच्चय A के घात समुच्चयों की संख्या 4 = 22 है। अतः, हम घात समुच्चयों की संख्या ज्ञात करने के लिए एक सामान्य सूत्र बना सकते हैं। मान लीजिए m किसी समुच्चय के अवयवों की संख्या है तो घात समुच्चयों की संख्या 2m होगी। उपरोक्त समुच्चय A के लिए अवयवों की संख्या m = 2 है, अतः घात समुच्चय 22 = 4 होंगे।

सार्वत्रिक समुच्चय

वह समुच्चय जिसके अंतर्गत अनेक समुच्चय आते हैं या हम कह सकते हैं कि वह समुच्चय जो अनेक समुच्चयों का मुख्य या मूल समुच्चय होता है, सार्वत्रिक समुच्चय कहलाता है। सार्वत्रिक समुच्चय को U से निरूपित करते हैं।

उदाहरण -1) सम संख्याओं के समुच्चय के लिए सार्वत्रिक समुच्चय प्राकृत संख्याओं का समुच्चय N या वास्तविक संख्याओं का समुच्चय R हो सकता है।

2) अंग्रेजी वर्णमाला में, स्वरों के समुच्चय के लिए, सार्वत्रिक समुच्चय अंग्रेजी वर्णमाला का समुच्चय होगा।

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